
बस गए हैं प्रभु मन मंदिर में
अदभूत छवि अनूप
अंखियां देखें शिव का रूप।।
भजन गायक : रंजीता शर्मा
जाता से गंगा बहती पवन
चंद्र ललित रूप मन भवन।।
मुख मंडल मुस्कान भरे हैं
सुंदर सत्य स्वरूप
रहते हो प्रभु तुम कान कान
सुख अनंत है शिव के चरण में।।
त्रिशूल धारी हे त्रिपुरारी
तुम्ही छाव और धूप
एक बार जो तेरे चरण पड़े शिव भजन लिरिक्स
मेला लगया भोले दा शिव भजन
भोर भाई अब जागो भोले भक्त खड़े है द्वार पे तेरे
ओ भोले की बारात आगयी शिव भजन
उतरे मुझमे आदियोगी शिव भजन
ओ दुनिया के रखवाले भोले शंकर डमरू वाले
सुबह की पहली किरणों में शिव का रूप समाया
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