
अज्ज तेरी, कल मेरी, वारी आएगी
हे माँ झण्डेवाली, सब पे कर्म कमाएगी
अंधेर नहीं होगा, देर लग जाएगी
माँ झण्डेवाली, सब पे कर्म कमाएगी
हिम्मत रख, भरोसा रख
क्यों है दुखों से चूर, वारी आएगी जरूर
लाखों करोड़ों हैं दर से, मांगने वाले
तूँ भी आ के अपनी, झोली फैला ले
मेहरांवाली अम्बे, माँ मेहर करेगी
संकट सबके टालेगी, ना देर करेगी
कर देगी, वर दाती, खुशिओं से भरपूर,
वारी आएगी जरूर
उसके दर पे होती, सबकी सुनवाई
कभी किसी की अर्ज़ी, माँ ने ना ठुकराई
उसके आगे, समय का चलता, फेर नहीं है
देर भले हो जाए, पर अंधेर नहीं है
सुनने को, तेरी बिनती, हो जाएगी मज़बूर,
जग में तुमसे ज्यादा, कोई सुखी नहीं है
कौन है चंचल जग में, जो दुःखी नहीं है
दुःख सुख के तो, चारों ओर लगे हैं मेले
इस के, चक्र में तो, हम ही नहीं अकेले
धुप और छाँव, रहेंगे सदा, *यह जग का दस्तूर,
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