
अपनी करनी से प्रिय यु मैं शर्म सार हु
Apani Karani Se Priy Yu Main Sharm Saar Hu lyrics
अपनी करनी से प्रिय यु मैं शर्म सार हु,
अपना लो या ठुकरा दो श्री राधे तेरा गुन्हे गार हु ,
अपनी करनी से प्रिय जो मैं शर्म सार हु,
काजल से भी बढ़ कर है मेरे कर्म काले,
फर्याद क्या सुनाऊ मैं लव पर पड़े है ताले,
पागल मन भजन कैसे गाये इस में ही लाचार हु,
ना दीं ता है ना भाव भक्ति न कुछ भजन है तेरा,
काम क्रोध मद मोह लोब ने ऐसा मुझको गेरा,
कैसे अपनाओ गई मुझको मैं तो बेकार हु,
तेरे भजन बिन जीवन ऐसे जैसे नैया बिन पानी,
करले भजन प्रिय का मिल जाए ब्रिज रजधानी,
कैसे विसारो गी हर मेरी मैं दूसरी सरकार हु,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.

