
अपनी मर्ज़ी नहीं चलदी, तुसी सदया ते असी आये,
असी कई सुनेहे घल्ले, साडी पेश कोई ना चल्ले,
हुन तुसा ने कर्म कमाए,
अपनी मर्ज़ी नहीं चलदी.....
तेरे दर दी रीत निराली, सारे कहन्दे ने,
कोई मुड़िया ना दर तो खाली, सारे कहन्दे ने,
साडी खाली झोली भरदे, असी तरले मिंता करदे,
तेरे दर ते डेरे लाये,
असी बड़े चीरा तो गणपत उडीका लाईया ने,
अज्ज तेरे मिलन दिया सोहनिया घड़िया आईया ने,
सादे चेहरिया उत्ते लाली, असी बन गए तेरे सवाली,
साथो ख़ुशी ना झल्ली जाए,
असी चल के द्वारे तेरे दाता आवागे,
असी तेरे सोहने मुखड़े दा दर्शन पावागे,
मेरा गणपति दीन दयाला है भगता दा रखवाला
बिगड़े काज सिद्ध कराये,
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