
अपने दिल का दरवाजा हम
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है,
सपने में आ जाना कान्हा ये बोल के सोते है,
सपने में आये तू कही आंख न खुल जाये,
बाते करते करते दिन रात निकल जाये,
इस दुनिया से हर नाता हम तोड़ के सोते है,
सपना टूटे मेरा सपने में खो जाऊ,
सपने की चाहत में मैं फिर से सो जाऊ,
जीवन की सारी ईशा हम छोड़ के सोते है,.
ये प्रेम हमारा श्याम बस इतना बढ़ जाये,
सपने में आने की तुझे आद्दत पड़ जाये,
बनवारी इन हाथो को हम जोड़ के सोते है
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