
अपने सीने दयालु,
मुझको लिपटाइए,
मेरे हालात पे,
कुछ तरस खाइए,
तरस खाइए,
तर्ज – गुरुवर चरणों में दे दो।
मेरे बस में अगर,
कुछ भी होता प्रभु,
आपके आगे फिर क्यों,
मैं रोता प्रभु,
मेरी उलझन को अब,
श्याम सुलझाइए,
सुलझाइए,
दर के आचक पे कुछ तो,
दया कीजिए,
दिल के जख्मों पे मरहम,
लगा दीजिए,
बस दिलासों से हमको,
ना बहलाइए
मैंने देखा सभी का,
कि बनकर प्रभु,
ठेस ही बस लगी,
मेरे दिल को प्रभु,
आप तो कम से कम,
मुझको अपनाइए,
श्याम अपनाइए,
आप ही फेर लेंगे,
जो ‘माधव’ नजर,
आप ही बोलिये,
जाएंगे हम किधर,
अपने दर से ना हमको,
यूं छिटकाइए,
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