
अब के बरस तुझे,
धरती की रानी कर देंगे,
अब के बरस तेरी,
प्यासों में पानी भर देंगे,
चुनर को धानी कर देंगे,
अब के बरस,
ये दुनिया तो फानी है हो,,
बहता सा पानी है हो,,
तेरे हवाले ये ज़िंदगानी,
ये ज़िंदगानी कर देंगे,
ये भी देखे – है प्रीत जहाँ की रीत सदा।
दुनिया की सारी दौलत से,
इज़्ज़त हमको प्यारी,
मुट्ठी में किस्मत है अपनी,
हमको मेहनत प्यारी,
मिट्टी की कीमत का जग में,
कोई रतन नही है,
ज़िल्लत के जीवन से बदतर,
कोई कफ़न नही है,
देश का हर दीवाना अपने,
प्राण चीर कर बोला,
बलिदानों के खून से अपना,
रंग लो बसंती चोला,
अबके हमने जानी है हो,,
अपने मन में ठानी है हो,,
हमलावरो की ख़तम कहानी,
ख़तम कहानी कर देंगे,
सुख सपनो के साथ हज़ारों,
दुख भी तूने झेले,
हंसी खुशी से भीगे फागुन,
अब तक कभी ना खेले,
चारों ओर हमारे बिखरे,
बारूदी अफ़साने,
जलती जाती शमा जलते,
जाते है परवाने,
फिर भी हम ज़िंदा है,
अपने बलिदानों के बल पर,
हर शहीद फरमान दे गया,
सीमा पर जल जल कर,
यारों टूट भले ही जाना,
लेकिन कभी ना झुकना,
कदम कदम पर मौत मिलेगी,
फिर भी तुम ना रुकना,
बहुत सह लिया अब ना सहेंगे,
सीने भड़क उठे है,
नस नस में बिजली जागी है,
बाज़ू फ़ड़क उठे है,
सिंहासन की खेर करो,
ज़ुल्मो के ठेकेदारों,
देश के बेटे जाग उठे,
तुम अपनी मौत निहारो,
अंगारो का जश्न मनेगा,
हर शोला जागेगा,
बलिदानों की इस धरती से,
हर दुश्मन भागेगा,
हमने कसम निभानी है,
देनी हर क़ुर्बानी है,
अपने सरों की,
अंतिम निशानी भर देंगे,
स्वर – महेंद्र कपूर जी।
प्रेषक – ऋषि कुमार विजयवर्गीय।
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