
अब तो आजा सांवरिया रे
अब तो आजा सांवरिया रे
जिन्हें देखने को जिए जा रहें हैं
वो पर्दा पे पर्दा किये जा रहें हैं
निकल आओ परदे से बांके बिहारी
हमें तेरा पर्दा गंवारा नहीं है
प्यारे पर्दा हटा लो ज़रा मुख से
रुख महफ़िल में एकदम बदल जायेगा
जो बेहोश हैं होश में आएंगे
गिरनेवाला भी फिर से संभल जायेगा
अब तो आजा
बताओ यूँ परदे में कब तक छिपोगे
तुम्हें मुख से पर्दा हटाना पड़ेगा
मुबारक हो तुमको ये मेरी मोहोबत
तुम्हें सामने मेरे आना पड़ेगा
तुम मेरे पास बैठो तसल्ली न हो
वक़्त मेरा भी अच्छा गुजर जायेगा
ये क्या कम है मशीहा तेरे आने से
मौत का भी इरादा बदल जायेगा
हम देखेंगे तुम कब तक ना मिलोगे
और कब तक महर ये नज़र ना करोगे
आएगा एक दिन ऐसा जमाना
हम रुठेंगे तुमको मनाना पड़ेगा
तुम जान अयोग्य बिसारो मुझे
पर मैं न तुम्हें बिसराया करुँ
मेरी इसमें ख़ुशी तुम रूठा करो
मैं अकेले में तुमको मनाया करूँ
मेरे रोने से तुमको जो आये हंसी
हम रो रो के तुमको मनाया करेंगे
तेरे चरणों की धूलि को चन्दन समझ
मैं तो माथे पे अपनी लगाया करुँगी
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