
अम्बाजी
हे अंबे
अम्बाजी अम्बाजी,
अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी,
अम्बाजी ओ मेरी अम्बाजी,
नवरात्रि रातो में रूप नौ ध्याये,
अलग अलग रूप धर मात मेरी आये....
पहली माँ शैलपुत्री पार्वती माता,
शंकर अर्धांगिनी शेरोंवाली माता,
दुजी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म स्वरूप ध्याये,
जो भी रूप धरे मैया हमको बहुत भाये,
जय जय जय माँ
घंटास्त चंद्रमा चंद्र घंटा तेरे,
परमानंद देती मैया पाप कटे मेरे,
उदर में संसार धरे कूष्माण्डा माता,
पाप ताप हरे तीन लोको की ज्ञाता,
स्कंद देव की जननी देवी स्कंद माता,
कितने पुण्य कितने तप पायी ऐसी माता,
ऋषियों की रक्षा करने प्रगट भयी कात्यायनी,
तू ही माँ चामुंडा तू ही माँ जगत जननी,
जय जय जय जय माँ
काल की विकाल भयी देवी काल रात्रि,
रक्षा करने सक्षम माँ इसकी हमको खात्री,
आठवीं माँ गौरी है रूप गौर गौर है,
चारो और तेरे नाम का ही मचा शोर है,
सर्व सिद्धि देने वाली नवमी सीधी दात्री,
अष्टभुजा नवदुर्गा रूप से नवरात्रि,
नाम लिये नाच नाच तेरे गुण गायेंगे,
छोटे से जीवन में पुण्य कुछ पायेंगे,
अलग अलग रूप में धर मात मेरी आये,
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