
अम्बे भवानी तेरी आरती गाऊं,
शिव पटरानी तेरी आरती गाऊं,
आरती गाऊं मैया आपको मनाऊं,
अंबे भवानी तेरी आरती गाऊं,
तर्ज – परदेसियों से।
शीश मुकुट मैय्या अद्भुत सोहे -२,
लाल चुनर सबके मन मोहे -२,
देख छवि माँ बलि बलि जाऊं,
चरणों की तेरी छवि निराली -२,
चरणों पे जाए मैया ये दुनिया वारी -२,
उन चरणों पे मैं शीश नवाऊं,
ध्यानूं भगत ने तुमको पुकारा -२,
कटा हुआ शीश तेरे चरणों पे वारा -२,
घोड़े का शीश तूने पल में लगाया,
मैय्या अनाथ की नाथ आप हो -२,
जीवन धन मेरी प्राण आप हो -२,
चरण कमल पे मैं बलि-बलि जाऊं,
पीर हरो हम सबकी ओ माता -२,
सारा जगत तेरा ध्यान लगाता -२,
आज तुम्हें मैं दिल से बुलाऊं,
कहत गिरीश हे जग-कल्याणी -२,
कृपा करो हे आदिभवानी -२,
भक्तों की पीर मैं तुमको सुनाऊं,
लेखक एवं गायक – पं गिरीश पाण्डेय।
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