
अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले भवन में...
है नवरातो का दौर धरा पे छा रही है हरियाली,
लगे बोल न पपीहा मोर कुक रही कोयलिया काली,
आई सुखो की नयी बहारे आई सुखो की नयी बहारे,
दुःख को सब भूले भवन में,
भवन में अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले,
सरस्वती और शिव शंकर का डमरू वीणा बाज रहे,
वामन भैरो छप्पन कलुआ ठुमक ठुमक के नाच रहे,
फूल बरस रहे देव लोक से फूल बरस रहे देव लोक से,
देव समाये ना फुले भवन में,
शीतल मंद हवा के झोके चल रहे होले होले होले रे,
बरखा रानी बरसे थम थम अपना घूँघट खोले रे,
नाच रहे माँ के दीवाने मटका मटका कुले,
भवन में भवन में अम्बे माँ झूले भवन में अम्बे माँ झूले,
कहे अनाड़ी जश्न मनाया नभ में दसो दिशाओ ने,
जयकारे माता के बोले मिलकर मस्त फिजाओ में,
ऐसे में ऐ लक्खा तू भी ऐसे में ऐ लक्खा तू भी,
चरण मईया के छू ले भवन में,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.
