
अरज सुनो मेरे साँवरिया,
हमने सहारा तेरा लिया,
तर्ज – घर आया मेरा परदेसी।
क्या यू ही हमें तरसाओगे,
बाबा कब हमें दरश दिखाओगे,
नैना हो गये बावरिया,
अरज सुणो मेरे साँवरिया,
जब गज ने तुमको पुकारा था,
तूने जल में ग्राह को मारा था,
गज ने तेरा नाम लिया,
जब द्रोपदी तुझको टेरी थी,
तूने एक पल ना देरी की,
तू चिर मे आकर समा गया,
ये दास कन्हैया तेरा है,
मेरा तेरे भरोसे डेरा है,
तूने सबका पूरण काम किया,
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