
अरे सतगुरु हाथ धरीया सिर ऊपर,
सही सही नाम सुनाया जी,
अमर जडी रा पिया प्याला,
दोई-दोई तार मिलाया जी,
अरे लिया फेक मरदाना अवधु,
मन मेरे मस्ताना ए हा।।
तीन गुणों री बाबा रेण बनाई,
धीरे धीरे शिखर चढाया जी,
अरे यु करे ने बाबा खबरा तो लीनी,
हम से हुकम हलाया जी,
अकल कला ओर भगतर टोपी,
खमीयो रा खडंक समाया जी,
अरे फेर खाक ने तरमर लडीया,
हेमर दूर हटाया जी,
अरे पदम सिहांसन मेरे मन लागो,
दर्शन रा फल पाया जी,
अरे केवे डुंगरपुरी अब नहीं डरना,
अविनाशी वर पाया जी,
गायक – जोग भारती जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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