
आओ गवरी रा गणराज,
विनायक दूंद दुन्दाला,
सिंदूरया सूंड सुंडाला।।
विश्वकर्मा विश्व रचाया,
सृष्टि में प्रथम पुजाया,
माया सकल मनावे आज,
सब बाट देवता जोवे,
थाने सुमरया हो सिद्ध होवे,
होवे सफल मनोरथ काज,
ब्रह्म वेद बखाने वाणी,
तुम तैतीसा अगवाणी,
राणी रिद्ध सिद्ध सिरताज,
शुद्ध वाणी निकले मुँह से,
‘भैरव’ भगवान भरोसे,
तोसे अर्ज करू महाराज,
गायक – बद्री लाल जी गाडरी।
प्रेषक – चारभुजा साउंड सिस्टम।
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