
आजा आजा भवानी मैया, शेर पे चढी ।
शेर पे चढी री, मैया शेर पे चढी ॥
एक हाथ त्रिशूल विराजे, दूजे में है थाली ।
सबसे पहले तोय मनाएं, कलकत्ते की काली ॥
बावन भैरू छप्पन कालवा, जगन चाले अगाड़ी।
भूरा शेर पे करे सवारी, लांगुरियो सपनाणी ॥
नल राजा ने तोय बाडा, लखिया बन के मांहिं ।
गजमोतिन सूं ब्याव करायो, दानो दियो मरै ॥
इन भगतन ने तोय मनाई, या बस्ती के माही ।
इन भगतन की लाज राखजा, भरी सभा के माही ॥
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