
माता गोरा का लल्ला,
शिव जी का है ये दुलारा ।
मूषा है जिनकी सवारी,
देवों में हैं सब से निराला ।।
के भक्तों झूमो नाँचों गाओ ।
आज गणपति आए हैं ।।
लम्बी लम्बी सूंड है जिनकी,
चौड़े चौड़े कान हो ।
सब से पहले होती पूजा,
देवों के सरताज हो ।।
मोदक के भोग लगाओ,
मेरे गणपति को मनाओं ।
की होगा सब का बेड़ा पार,
रिद्धि सिद्धि के हैं ये स्वामी,
लम्बोदर है नाम हो ।
तीन लोक में इनकी महिमा,
बुद्धि के भण्डार हो ।।
सच्चे मन से जो आये,
मन माँगे मुरादे पाए ।
के देते खुशियाँ अपरम्पार,
गली गली और गाओ शहर में,
गूंजे जय जय कार हो ।
चूहा पे बेठ के आये गजानन,
माँ गोरा के लाल हो ।।
अंजलि और अम्बे आये,
गणपति जी के गुण गाये,
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