
आतो खेड़ा वाली नगरी माने घणी रूपाली लग री
आतो खेड़ा वाली नगरी,
माने घणी रूपाली लग री,
रामदेव परचा देवे,
पीरजी दर्शन देवे,
पीरजी दुख हर लेवे।।
फेपसिंह ने सपना माई,
बाबो दर्श दिखावे,
मिन्दर मारो बनवानो है,
बाबो यु फरमावे,
बाबो मार्ग यु बतलावे,
बाबो ब्राह्मण रूप धरावे,
जयपुरीया सु मूरत लेने,
आवे खेडा माई,
रामदेव परचा दिखलावे,
आंगन पग दे माई,
घोडो त्रिशूल डाली बाई,
पगल्या निकल्या थाली माई,
सांझ सवेरे होवे आरती,
हरदम ज्योता जागे,
दर्शन करिया राम धणी रा,
भाग पुरबला जागे,
बाबो मेटे कष्ट बिमारी,
आवे विनती सुनी भगतारी,
बांजनीया ने बेटा देवे,
बाबो गोद भरावे,
भीड़ पडी जद आवे हेले,
लीले चढने आवे,
बाबो बिगड्या काम बनावे,
भगता ने पार लगावे,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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