
आलो शरण तुला भगवंता लिरिक्स
पेटून उठला वनवा सारा
तिन्ही जगाला लागली आग
नसे आसरा नाहीं निवारा
जाऊ कुठे मी सांग विट्ठला
जाऊ कुठे मी सांग
आलो शरण तुला भगवंता
घेई कुशीत तुझ्या भगवंता
पूण्य झाले स्वस्थ जगी
त्याला नाहीं भाव
पुण्यवान होई रंक
पापी झाला राम
नाही थारा इथ गुणवंता
सत्यवान सावित्री चा
संपला जमाना
वैश्या करी चारित्रयाचा
खोट च बहाना
झाली दिन वाणी पतिव्रता
कुम्पंच खायी शेत
त्याला नाहीं लाज
घरचा च रखवाला
वैरी झाला आज
देई आसरा दिन वन्ता
ऐसे ही सुन्दर भजन आप निचे दी गयी सूचि में देख सखते है
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