
आवोनी पधारो मारे आंगणिये खेतेश्वर,
आवोनी पधारो मारे आंगनिये खेतेश्वर,
मात पिता हो दाता थे गुरूवर,
मारा प्यारा परमेश्वर,
उगीया सु आठम बाबा खेतेश्वर ने टेरता,
सुतोडा सपना मे मेतो खेतेश्वर ने देखता,
प्रेम रा प्याला पाया भर भर कर प्रभु,
प्रेम रा प्याला पाया भर भर कर,
जटे देखु वटे नजर खेतेश्वर आवता,
घर घर गली गली में भजनों मे जावता,
पार लगावे माने भवसागर ओ प्रभु,
पार लगावो माने भवसागर,
प्रेम सु परोसीयो थाने भाव रा भोजनीया,
खेतेश्वर दाता आया मारोडे आंगनिया,
फुलड़ा बिछावु मेतो डगर डगर,
ओ प्रभु फुलड़ा बिछावु मेतो नगर नगर,
प्रेम रे पालनीये हुलरावो गुरूदेव ने,
गुण तो गावु में सारी उमर ओ प्रभु,
गुण तो गावु मे सारी उमर,
मन में बसीयो रे मारो जोगी अलबेलो,
खेतेश्वर गुरूजी मे बनगीयो थारो चेलो,
दास गोपाल केवे दाता गुरु ने सिवर,
दाता गुरु ने सिवर,
गायक – शंकर जी टाक।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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