
आहे जब लेऊँ राम का नाम,
गुरूजी मेरः याद घणे आवं।।
पास बिठा समझाया करते,
बाबा त मिलवाया करते,
वे दिन ना भुले जावं,
सारे शक्ति सौंप गए री,
ना सतगुरू मेरे पास रहे री,
संत इसे टोहे ना पावं,
भोली भोली सुरत लागे प्यारी,
उनमें दिखं मुगदरधारी,
या दुनिया न्युं दर्शन चहावः,
जब जब बैठुं मैं जोत जगा क,
रोए जां सुं मैं टकरा क,
आंंसु गुरू गुरू गावंः,
अशोक भक्त सतगुरु का प्यारा,
राजपाल इब रह गया न्यारा,
सतगुरु ना टोया पावः,
गायक – नरेन्द्र कौशिक।
भजन प्रेषक – राकेश कुमार जी,
खरक जाटान(रोहतक)
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