
आह केवुं भाग्य जाग्युं भजन लिरिक्स
आह केवुं भाग्य जाग्युं, वीरनां चरणों मल्या,
रोग शोक दारिद्र सघला, जेहथी दूरे टल्या।
फेरो टल्यो छे दुर्गति नो शुभगति तरफेणमां,
अल्प काले मोक्ष पामी विचरशुं आनंदमां।
जेमनो तपनो न महिमा कही शके सक्रेश भी,
तेमने हुँ स्तवुँ शु बालक भक्ति नो ज्या लेश नहीं।
कामधेनु कामकुंभ चिंतामणी सवि तु मल्यो,
आज मारे आंगने श्री वीर कल्प तरु फल्यो।
लब्धि ना भंडार व्हाला वीर वीर जपता थया,
गौतम श्री मोक्ष पामी ए प्रभुनी खरी दया।
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