
इक छोटी सी कन्या पार्वती शिव शंकर की पूजा करती थी,
अपने बाबा की बगइयाँ में जाती थी,
डलियाँ भर फूल ले आती थी,
उस फूल की माला बना कर के शिव को पहनाया करती थी,
वो गंगा तट पे जाती थी गंगा जल भर के ले आती थी,
गंगा जल ला कर के अपने भोले को चढ़ाया करती थी,
वो गौशाला में जाती थी गइयाँ का दूध ले आती थी,
गइयाँ का दूध ला के आशनां कराया करती थी,
खुश हो कर के शिव वरदान दिये भक्ति का भाव पहचान लिए,
कुलदीप देविंदर के संग में शिव का गुण गाया करती थी,
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