
इतनी मेरी विनती तुमसे पूरी करना श्याम कसम से
इतनी मेरी विनती तुमसे,
पूरी करना श्याम कसम से,
और नहीं कुछ चाहूं,
बस जनम अगला बाबा,
तेरे खाटू में पाऊं,,
जब तक तन में सांस हमारे,
आके यूं ही द्वार तुम्हारे,
चरणों में शीश झुकाऊं,
तर्ज – तेरा साथ है कितना प्यारा।
मैंने अपने कर्मों का,
पूरा फल पाया,
खाटू की धरती मिली,
और तेरा साया,
जीना मरना, शाम यहीं अब,
और कहीं ना जाऊं,
पत्थर का एक टुकड़ा था,
पारस मुझे किया,
जब से जीवन सांवरे,
तेरी शरण किया,
तेरा करम जो, मुझ पे हुआ है,
कैसे उसे भुलाऊं,
मेरी क्या औकात है,
सब तेरा एहसान,
तुमने अपने प्रेमी का
हर पल रखा ध्यान,
‘योगी’ कहता, पल पल बाबा,
तेरा शुक्र मनाऊं,
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