
इन रे आंगनीये है सखी,
केई नर खेलन आया ओ,
केई खेल्या ने केई नर खेलसी,
केई नर खेल सिदाया ओ,
इण रे आंगनीये है सखी।।
भई रे तीन खुना री झूपडी,
आ निशदिन झूठी रे,
तीन खुना री झूपडी,
नैन हमारा यु जरे,
ज्यु गागर फूटी रे,
आवो रे पाँच सहेलीया,
सिव दो नी मेरा चोला ओ,
मै हूँ ग्यान गरीबनी,
सायब मेरा भोला ओ,
जाय उतारीया परखना,
संगी पचे पछताया ओ,
थे तो साथीडा थारे घर जावो,
मै तो भया रे पराया ओ,
मै तो भया रे पराया रे,
भई रे आया परवाना अमरलोक रा,
अटे रेवन नही देला ओ,
आया परवाना अमरलोक रा,
अटे रेवन नही देला,
काची मे मदस्त यु मरे,
संतो सही कर लेना ओ,
संतो सही कर लेना,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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