
इन रे काया रो हिण्डोलो रचीयो डगमग झोला खाये
इन रे काया रो हिण्डोलो रचीयो,
डगमग झोला खाये रे मनवा,
चेती चालो ओ भाई रे,
चेते ने चालो बीरा पार लग जावो,
भवसागरीया माये रे मनवा,
चेते ने चालो ओ भाई रे,
काया बाडी रो किल्लो रे होसी,
आँख फरूके जाये रे मनवा,
बालपनो बचपन में खोयो,
जोबन रलीयो जाये रे मनवा,
बुढा होया जद माला रे पकडी,
जीव री काई गत होवे रे मनवा,
इन रे मार्ग मे केई नर सोया,
तोरल साध सुनावे रे मनवा,
गुरू प्रताप बोले रे रूपादे,
गुरू प्रताप बोले है रूपादे,
मालदे मे विनती सुनाई रे मनवा,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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