
इसीलिए बाबा ने मेरे कीर्तन ये कराया है
तर्ज : शायद मेरी शादी का खयाल
श्यामधणी ने ये दरबार खुद सजवाया है
दूर दूर से भगतों को कीर्तन में बुलाया है
ना.. ना.. ना..
हम सबसे मिलने का खयाल दिल में आया है
इसीलिए बाबा ने मेरे कीर्तन ये कराया है
1.. बैठा है सांवरा तू मत घबराना
चाहे जो मांग लेना जरा न शरमाना
इंतजार की घड़ी अब नही बाकी
सज गई मेरे सांवरे की ये सूंदर झांकी
बाबा ने भगतों को दिल में बिठाया है
इसलिए भगतों को कीर्तन में बुलाया है
खाटू से लीले चढ़ के बाबा आया है..
2.. आ गए हो दर पे तो कीर्तन भी गा लो
नाच के झूम के झोलियां भरवा लो
ये मेरा सांवरा बांट के राजी
भगतों को जितवाता हारी हुई बाजी
बाबा ने भगतों को हर बार जिताया है
इसीलिए भगतों को कीर्तन में बुलाया है
भगतों की झोली भरने को बाबा आया है..
3.. भगतों का बाबा से भाव का है रिश्ता
भाव हो जिसके दिल में वो ही समझ सकता
भगतों के बीचमें ही मन इनका लगता
देखकर भगतों को इनका चेहरा खिलता
बाबा ने ही अम्बरीष का भी मान बढ़ाया है
झूमो नाचो मिलजुल करके ये समझाया है..
जय श्री श्याम
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