
उड़ चला रे हनुमान
उड़ा चले रे हनुमान,
लिया राम जी का नाम ।
करके राम को प्रणाम,
करने राम जी का काम ।।
पार सागर को,
क्षण में किया है ।
श्री राम का सन्देश,
सीता माँ को दिया है ।।
कूदे जो लंका के अंदर,
द्वार खड़ी थी लंकिनी ।
मारा मुक्का एक घुमाके,
स्वर्ग सिधारी डंकिनी ।।
सभी राक्षश घबराए,
गदा हनुमत घुमाए ।
बोले जय जय श्री राम,
नारा जोर से लगाए ।।
काम रघुवर का,
हनुमत किया है ।
सीता माँ को मुंदरी डाली,
दी निशानी राम की ।
सीता माँ ने दे दिया चूड़ा,
खुश हुई माँ जानकी ।।
फल चुन चुन कर खाये,
बाग़ सारा उजाड़े ।
जम्बू माली को मारे,
पेड़ जड़ से उखाड़े ।।
जीना दुष्टों का,
मुश्किल किया है ।
हलचल मच गई लंका अंदर,
कांप गया है दसकंदर ।
पूँछ की इसकी आग लगा दो,
बच ना पाए ये बन्दर ।।
दूत लंका को आये,
खबर सीता की लाये ।
शुभ समाचार राम को सुनाये,
राम चरणों में वंदन किया है ।।
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