
हरि भजन को कल पर छोड़ा,
ये साँस निकल गई रे,
उमरिया धोखा दे गई रे,
उमरिया धोखा दे गयी रे।
तर्ज – कन्हैया ले चल परली पार।
बालापन हंस खेल गंवाया,
आई जवानी समझ ना आया,
सपना देख निकल गई उमरिया,
ये कछु ना दे गई रे,
आई जवानी नींद ना छूटे,
नींद ना छूटे तन मन टूटे,
स्वांसा तार अटक गयो तन में,
ये मौका दे रई रे,
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