
एक दो तीन चार श्याम तेरी जय जयकार
एक दो तीन चार !!!
याद नहीं हो रहा..क्या करूँ यार??
अच्छा ! मैं तुम्हे सीखाता हूँ भजनों वाली गिनती जिसे तुम कभी नहीं भूल पाओगे ...
एक दो तीन चार,श्याम तेरी जय जयकार,
पांच छै सात आठ,सारे बोलो मेरे साथ,
नौ दस एग्यारह बारा,श्याम मेरा प्यारा प्यारा,
तेरह चौदह पंद्रह सोला,बाबा मेरा बड़ा भोला,
सतरह अठारह उन्नीस बीस,तो चरणों में झुकाओ शीश
प्यारा है वो,सबसे न्यारा है वो,
आवो तुम्हे मेरे श्याम से मिलाऊँ,
श्याम के संग,श्याम नाम के संग,
आवो तुम्हे मैं गिनती सिखाऊँ
वन-टू का फोर...फोर-टू का वन...
अरे ऐसे नहीं...भजनों की गिनती ऐसे होती है...
वन-टू-थ्री फोर,श्याम मेरा माखन चोर,
फाइफ-सिक्स-सेवन-एट,खाटू का है ये सेठ
नाइन-टेन-एलेवेन-ट्वेल्व,हरदम ये करता हेल्प,
थर्टीन-फोर्टीन-फिफ्टीन-सिक्सटीन,रह ना सके भक्तों बिन
सेवेनटीन-ऐटीन-नाइन्टीन-ट्वेंटी...
श्याम के दरबार में पूरी गारंटी
हारना नहीं,कभी हारना नहीं,
हारे का साथी है श्याम हमारा,
साथ रहे,तेरे पास रहे,
हरदम बनाये ये काम हमारा |
भईया!! क्या श्याम हमारा फ्रेंड हमेशा रहेगा??
जब तक सूरज चाँद रहेगा,श्याम धनि का नाम रहेगा,
"सौरभ मधुकर" भूलना नहीं,बाबा का भजन कहो याद रहेगा |
क्या ये भजन तुम्हे याद हो गया,तो अब जरा गा के सुनाओ...
गीतकार - सौरभ मधुकर
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