
एक वानर ने लंका जलाई
जलाई जलाई जलाई,
एक वानर ने लंका जलाई,
बजरंगी ने लंका जलाई,
कूदे वो डाली डाली,
कर दी है बगिया खाली,
मार दिया है जम्बू माली,
चप्पे चप्पे में आग लगाईं,
घुमाई घुमाई घुमाई,
उसने ऐसी है पूछ घुमाई,
वो तो वीर है बांका लड़ाका,
सारी नगरी में किया धमाका,
किसी के सर को फोड़ा,
किसी की टांग है तोड़ा,
वो ऐसा घुसा मारे,
दिखाता दिन में तारे,
मची है हाहाकारी,
अकेला सब पर भारी,
उसने ऐसी है गदा चलाई,
लड़ने अक्षय कुमार भी आया,
मारी एक लात मार गिराया,
फिर मेघनाथ है आया,
जब नहीं जीत वो पाया,
है ब्रह्म का अस्त्र चलाया,
तो समझ राम की माया,
चले वो बंदी बनके,
काल बनके रावण के,
जब पूछ में आग लगाई,
‘राजपाल’ महाकाल आए,
अंजनी का लाल कहाये,
जो है श्री राम का प्यारा,
माता सीता का दुलारा,
बल देता देवे बुद्धि,
करता जो इनकी भक्ति,
‘लक्खा’ जयकार ,
बजरंग की महिमा गावे,
बांकी सूरत है मन में समाई,
समाई समाई समाई,
मेरे मन में है सूरत समाई,
करता हूँ इनकी भक्ति,
मिलती है मुझको शक्ति,,
जब भी अटकी है नाव चलाई,
बजरंग की है सूरत समाई,
गायक – श्री लखबीर सिंह लख्खा जी।
प्रेषक – महेश कुमार चुघ।
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