
ऐसा है मेरे श्री हरी का नाम कैसे उनका करूँ गुणगान
ऐसा है मेरे श्री हरी का नाम,
कैसे उनका करूँ गुणगान,
बांकी कोई न करुणा निधान।।
निश्छल भक्ति तेरी हरदम होती है,
लेते हैं जब परीछा तब तब रोती है,
ग्राह-गज की कथा में कहा है,
गज की प्रभु ने बचाई थी जान,
तेरी ही कृपा से प्रह्लाद बनते हैं,
ध्रुव सा महातपस्वी तेरा नाम जपते हैं,
जिनको विपदा से तुमने उबारा,
दे दिया उनको अपना ही धाम,
एक बार में भी उपकार करते हैं,
निर्धन विप्र सुदामा के भंडार भरते हैं,
द्रोपदी की बचाई थी लाज,
उनको ही है मेरा प्रणाम,
झूठे बेर खाकर संदेश देते है,
केवट का भी कहना कैसे मान लेते है,
सिल की तारी थी तुमने अहिल्या,
सबके पूरे हुए अरमान,
एप्प में इस भजन को कृपया यहाँ देखे ⏯
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.



