
ऐसी भगती नहीं कीजिए चेतावनी
ऐसी भगती नहीं कीजिए,
जग में होवे हाँसी ।
अंत काल जम मारसी,
गले में देदे फाँसी ।।
बुगला बायर ऊजळा,
भीतर कपटाई ।
आँख मींच मुनिजन भया,
मछियाँ गटकाई ।।
मिणजारी सुण कथा,
झूठा भारत कीना ।
कर से दीपक डार के,
मूषा गर लीना ।।
जैसे लाखा पिघळे,
पावक रे संगा ।
छिन एक दूर वो ले चले,
होवे वज्र अंगा ।।
जैसे कुंजर जळ बसे,
जळ वस्ती पूरा ।
जळ से बाहर नीकले,
सिर लगावे धूरा ।।
केवे कबीरसा धर्मीदास ने,
पाँचों से लड़िये ।
इण जुगड़े रे माँयने,
जीवत ही मरिये ।।
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