
ऐ श्याम तेरा दरबार बड़ा प्यारा लागे
श्याम तेरा दरबार,
दुनिया से निराला है,
जो भी आया दर पे तेरे,
तूने संभाला है,
तेरे दरबार की महिमा,
का क्या बखान करूँ मैं,
तू तो दीन दुखियों का,
सहारा है।
ऐ श्याम तेरा दरबार,
बड़ा प्यारा लागे।
मैं भूल गई संसार,
जितने भी रिश्ते नाते,
झूठे लगते सारे हैं,
हम सब प्रेमी बाबा,
तेरे ही सहारे हैं,
तूने इतना दिया है प्यार,
कर्ज तेरे मैं बाबा,
कैसे चुकाऊँगी,
खुद को मैं भूलू,
तुझको भूल नहीं पाउंगी,
अब तू ही मेरा परिवार,
जब भी जन्म लू बाबा,
गुण तेरे गाऊं मैं,
भजनों से तेरे बाबा,
तुझको रिझाऊ मैं,
यूँ ही आती रहूं दरबार,
धन और दौलत बाबा,
मेरे किस काम की,
अनुज को लगन है बाबा,
बस तेरे नाम की,
तूने इतने किये उपकार,
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