
ऐ श्याम शरण तेरी जो भी कोई आता है
ऐ श्याम शरण तेरी,
जो भी कोई आता है,
कहते आलूसिंह जी,
वो भव तर जाता है,
तर्ज – बचपन की मोहब्बत को।
देखे – ऐ श्याम तेरे दर पर।
हारी हुई बाजी को,
यहां जीत अवश्य मिलती,
मुरझाये हुए दिल की,
नजरो से कली खिलती,
जो भक्त प्रभु तुमको,
भावों से रिझाता है,
आंखो के आंसू से,
चौखट जो भिगोये तेरी,
तुम लाज रखो उनकी,
पल भर की ना हो देरी,
ऐ श्याम तेरे दर पे,
जो शीश झुकाता है,
तुमने महकाया श्याम,
‘शालू’ के जीवन को,
भटका सा था मैं प्रभु,
तुमने बहलाया श्याम,
बाबा अर्श की नैया को,
जब खुद ही चलाता है,
गायक – शालू अरोड़ा।
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