
ऐ सितमगर क्या तुन्हें सितंम कर दिया,
प्यार के बदले तुन्हें ग़म दे दिया
ऐ सितमगर क्या तुन्हें सितंम कर
दिया...
ऐसी मालुम तेरी जो होती मुझे,
अपने दिल में ना हरगिज़ बसाता तुझे
मैंने अन्ज़ानें में मैं ग़म का पिया,
प्यार के बदले तुन्हें,जख़्म दे दिया
ऐ सितमगर क्या तुन्हें...
तेरी तस्वीर आंख़ों के शीशे में है,
मेरी तक़दीर आंखों के शीशे में है
अपना ज़ानकर तुमको अपना लिया,
आजा सपनों में आनें वाले सामने भी आ,
अपनी सांवरी सलोनी सुरत हमको दिखा
मैंने अर्पंण तेरे ये तन मन किया,
तो पागल तेरा हुं मस्तांना तेरा,मैं दिवाना तेरा हुं दिवाना तेरा
तेरी नज़रों ने दिल मेरा घायल किया,
बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000
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