
ओह आऊदी मेरी माँ शेर पे ओह आऊदी
ओह आती, ओह आती मेरी माँ,
शेर पे ओह आती।
लाल चोला पहना हुआ,
पूरा श्रृंगार किया हुआ।
भक्तों की भीड़ में खुशियाँ लुटाती,
जो भी माँ के दर पर आया,
मुँह माँगा फल उसने पाया।
शेरों वाली आकर सबके दुखड़े मिटाती,
बजते ढोल-नगाड़े दर पर,
लगते ऊँचे जयकारे दर पर।
जोतों के बीच माता दर्शन दिखाती,
जनाल वाले के घर जागरण,
जसपाल खुश हुआ, माँ के दर्शन पाकर।
जागरण में आकर माँ, जागरण सफल कराती,
गीतकार — जसपाल जनाल
संपर्क: 8699406500
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