
ओ कान्हा आ रे, तू आजा मोहन गिरधारी
ओ कान्हा आ रे
5, तू आजा मोहन गिरधारी,कि तरसे गूजरियां सारी, पुकारे राधा बेचारी ओऽऽ5 ।। टेर ।।
तर्ज – ओ बाबुल प्यारे ।
सूना पड़ा है मधुबन सारा, तेरे बिना ओ कन्हाई-२आजा सूना यमुना तट, तुझ बिन सूना है पनघट,सूना-सूना गुजरियों का मन, ओऽऽ
१ ।।
जमुना किनारे गूजरियों के, कपड़ों को कौन चुराये-२सूनी ग्वालों की टोली, सूने तेरे हमझोली,सूने-सूने हैं सबके नयन, ओऽ
२ ।।
भूल गया क्या कुँज गलिन में, तेरा वो रास रचाना-२,सुनके बंशी मतवारी, नाची गुजरियाँ सारी,मन का मन से हुआ था मिलन, ओऽ
३ ।।
अपना बनाके क्यों बिसराया, ओ निर्मोही बताजा-२,आझा माखन खाले रे, हमको लाख सताले रे,“हर्ष” सब कुछ करेंगे सहन, ओऽ
४ ।।
लिरिक्स – विनोद अग्रवाल (हर्ष) जी
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