
ओ बाबा इतना बता अब मैं जाऊं कहाँ,
जो ना मिला था कहीं वो मिला है यहाँ।।
तर्ज – हे भोले शंकर पधारो।
तेरी माया कोई समझ नहीं पाया,
हारे हुए को गले से लगाया,
गिर नहीं जाऊँ कही मैं थक चूका हूँ,
चल नहीं पाऊँ अब मैं रुक चूका हूँ,
ओ बाबा भटकुँ ना मैं अब यहाँ से वहां,
करता हूँ विनती तेरे दर पे आकर,
मुझको बना ले बाबा तू अपना चाकर,
भक्ति की रस में रखना अपने डूबाकर,
सुधर जाए जीवन तेरे गुण गाकर,
ओ बाबा चरणों में थोड़ी दे दे अपने जगह,
मेरा परिवार चले तेरे ही सहारे,
इस गुलदस्ते में तुमसे बहारें,
छोटे छोटे फूल कहीं मुरझा ना जाए,
इसीलिए बाबा तेरी शरण में आए,
ओ बाबा कर देना माफ़ ‘अंजलि’ के गुनाह,
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