
ओ वृंदावन रहिण वालिया
(धुन – सांवरे से मिलने का)
तेरी शान निराली ए ॥
ओ तेरे नाल, लाईयां अखियां... हो... ।
साडी रोज दिवाली ए...
ओ वृंदावन रहिण...
ओ सांवरे ने दिल मंगिया,
अस्सीं झटपट हां कीती ॥
ओ जनमां दा साथ मेरा... हो... ।
मेरे शाम ने हां कीती...
ओ सोहणे सोहणे नैणा वालिया,
दिल आ गया तेरे ते ॥
ओ वृंदावन रहिण वालिया... हो... ।
अस्सीं आशिक तेरे ते...
ओ तेरे पिछे जग छड्डिया,
सानूं तेरा सहारा ए ॥
ओ तेरा एह दवारा सज्जणा... हो... ।
सानूं जान तों प्यारा ए ॥
अपलोडर – अनिल राममूर्ति भोपाल
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