
ओ श्याम जी पड़ा रहने दे अपनी शरण में
ओ श्याम जी पड़ा रहने दे,
अपनी शरण में,
पड़ा रहने दे,
जहाँ जाऊँ भरमाऊँ,
कहीं चैन ना पाऊँ,
कुछ दिल की भी कहने दे,
तर्ज – ओ राम जी बड़ा दुःख दीना।
ये दुनिया है एक पहेली,
पल में बैरन पल में सहेली,
मै तो चाहु सुलझाऊँ,
खुद उलझ ही जाऊं,
उलझन से परे रहने दे,
दुनिया के आगे रोया ही रोया,
कुछ नहीं पाया खोया ही खोया,
मेरे आंसू की कदर तब होगी अगर,
इन चरणों में बहने दे,
द्वार तेरा उलझन की कुंजी,
नाम तेरा बस साची पूंजी,
चाहे जितने हो गम,
ढाए दुनिया सितम,
मुझे हस हस कर सहने दे,
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