
औघड़ दानी रहा अलख जगा,
दोहा – जन्म लिए श्री कृष्ण कन्हाई,
जग में हुआ उजाला,
नाची धरती झूमा अम्बर,
लो आया भक्तों का रखवाला।
खुली समाधी भोले की,
हुई श्याम दरश की चाह,
बनके औघड़ चढ़ नंदी पे,
बाबा चले गोकुल की राह।
मैया तुम्हारे दर पे खड़ा,
तर्ज – कोई परदेसी आया परदेस में।
देखे – भोला भंडारी आया।
अंग भभूति तन मृग छाला,
सर्पो के गहने रे गले मुंडमाला,
देख डर जाएगा रे मेरा लाडला,
कण कण में मैया वास है जिनका,
जन जन को अहसास है जिनका,
कालो का काल है जो सबसे बड़ा,
हिरे लेजा मोती लेजा भरभर थाल तू,
मांग ले जो चाहे जोगी मैं तत्काल दूँ,
लेके घर जा रे तू क्यों जिद पे अड़ा,
दिखा दे झलक मैया अपने सपूत की,
दर्शन की भिक्षा डालो झोली अवधूत की,
लाल तुम्हारा मेरे चित पे चढ़ा,
रोया कन्हैया मैया घबराई,
गोद में उठाकर दौड़ी दौड़ी आई,
नज़र ना लगाना तेरा होगा भला,
दर्शन करके शिव त्रिपुरारी,
नाचे रे भोला मेरा देख बिहारी,
मौका है चोखा ‘लख्खा’ झूमझूम गा,
स्वर – लखबीर सिंह लख्खा जी।
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