
हो विश्वनाथजी तरन हार है
चरणो में जिनके है संसार।।
शिव के नाम की माला जपले
हो जाएगा तेरा बेदा पार।।
नंदी पे शंकर
शिव गंगाधर
भाल पे चंदा
शिव नागेश्वर।।
शिव के नाम के प्यासा पीले
तन मन से तू शिव का होल।।
फिर दर्शन देंगे शिव शंकर
कंकड़ कंकर शंकर
दर्शन देंगे शिव शंकर।।
जय जय शिव शंकर
दर्शन देंगे फिर शिव शंकर
शिव का शिवाला बड़ा निराला
बैठे है जहां दीन दयाला
धन्य धन्य प्राणि हो जाता
शिव की भक्ति करने वाला।।
ओम नम शिवाय
कैलाश पे रहने वाले
धरती पर आ जाते हैं
बिन मांगे भोले भंडारी
झोली सबकी भर जाते हैं।।
शिव के द्वारे शीश झुकाओ
विनती करके श्रद्धा दिखाऊ
कस्त मितये प्रलयंकर
शंभु कंकर कंकर शंकर।।
शिव कांकर कंकर शंकर
शंकर शंकर शिव शंकर।।
देवो में देवा है महादेवा
शिव गढ़ जिन्की करते सेवा
भक्ति से जो नाम है भजते
शिव उनका कल्याण है करते।।
कहते हैं जो भोले नाथ की
निश्चल भक्ति करते हैं
शिव का नाम कल्याण कारी है
शिव उनकी पीडा हरते है।।
शिव का दर्शन शिव का पूजन
मंगल कारी शिव का वंदन
शिव अमृत पिलादे सोमेश्वर।।
सारे जग को पालते हैं मेरे नील कंठ भगवान
मन छोड़ व्यार्थ की चिंता तू शिव का नाम लिए जा
बेल पे चढ़े आ गए भोले डम डम डमरू शिव का
शिव भोले जी के द्वारे तू चल रे कंवरिया प्यारे
आदि गुरु हैं देवो में भोले शंकर रामेश्वरम नागेश्वर शिव भजन
कांवरियों का त्योहार आया शिव भजन
सुध लेना भक्तों की शंभू त्रिपुरारी
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