
वेखो मईया जी ने कैसी लीला है रचाई,
रूप कन्या दा धार के है, आई भोली माँ,
कंजकाँ नाल खेडे......
कंजकाँ नाल खेडे.....जय जय माँ,
ब्रह्मा, विष्णु, महेश होन दंग वेख वेख।।
छड मंदिरा नू बागा विच आई भोली माँ,
उच्ची पीपली पींघा पाईया, देवन कंजकाँ झूटा,
ओ भगतों देवन कंजकाँ झूटा।
बागा दे विच महक खिलारे हर पत्ता हर बूटा,
बूटा ओ भगतो हर पत्ता हर बूटा।
गिद्धे कंजकाँ ने पाए, नाले गुण ओहदे गाये।।
सारे तक्क के नज़ारे मुस्काई भोली माँ,
सोउन महीना अंबरा विचो रहमत माँ दी बरसे,
ओ भगता रहमत माँ दी बरसे।
चरणा दी छोह शास्त्र वेखो इंदर भी पिया तरसे,
तरसे ओ भगतो दर भी पिया तरसे।
ठंडी हवा दे फुहारे देंदे पींघा नू हुलारे।।
विच बागा दे बहार लेके आई भोली माँ,
गोटे वाली चुन्नी सिर ते गल विच मोती माला,
माँ दे गल विच मोती माला,
सुंदर रूप मईया दा आखे करमा रोपड़ वाला,
ओ भगतो करमा रोपड़ वाल।
सोहना बाहां विच चूढ़ा रंग मेहँदी दा भी गूढ़ा।।
लाल बाने विच सज के है आई भोली माँ,
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