
कन्हैया दौड़ा आएगा अपने भगत की आँख में आँसू
अपने भगत की,
आँख में आँसू,
देख ना पाएगा,
जब जब भी श्याम दिवानों के,
सर पे संकट मंडराएगा,
कन्हैया दौड़ा आएगा,
अपने भगतों के लिए,
कुछ भी कर जाएगा,
तर्ज – मोहब्बत बढ़ती जाएगी।
जब दूर सवेरा हो,
घनघोर अंधेरा हो,
मेरे श्याम की आस लगाए जा,
तू छोड़ दे नैया को,
बस श्याम भरोसे पर,
बस श्याम नाम गुण गाये जा,
बनकर के माझी साँवरिया,
भव सागर पार करायेगा,
हर एक मुसीबत ही,
खुद हल हो जाएगी,
जब मोरछड़ी लहरायेगा,
गोदी में बैठाकर के,
सीने से लगाकर के,
तेरे सिर पर हाथ फिरायेगा,
जितने भी अश्क बहे तेरे,
हर एक का मोल चुकाएगा,
विश्वास की डोरी को,
तू थाम ले कस कर के,
बाँका ना होगा बाल तेरा,
साये सा ‘तरुण’ तेरे,
संग चलता जाएगा,
ये बनकर के रखवाल तेरा,
संकट पे संकट बनकर के,
मेरा श्याम स्वयं चढ़ जाएगा,
श्री श्याम सखा मण्डल खैर, अलीगढ़।
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