
कन्हैया सांवरी सूरत मेरे दिल में समाई है
कन्हैया सांवरी सूरत,
मेरे दिल में समाई है,
गजब की बांसुरी तूने,
जो मधुबन में बजाई है,
तर्ज – बहारों फूल बरसाओ।
तुम्हारे हैं अधर प्यारे,
मधुर मुस्कान वाले है,
मोर का पंख माथे पे,
बाल तेरे घुंघराले है,
तुम्हारी मोहनी मूरत,
हमने दिल में बसाई है,
है तिरछी तेरी चितवन तो,
नैन तेरे कजरारे है,
नशीली तेरी आँखों पे,
हुए कितने मतवारे है,
तुम्हारी नजरों से मोहन,
चोट हमने भी खाई है,
है तन पे पीला पीताम्बर,
कि कांधे कमली काली है,
अदा है तेरी बांकी जो,
जमाने से निराली है,
हो छलिया चोर तुम मोहन,
नींद मेरी चुराई है,
गायक / प्रेषक – धीरज कुमार गोस्वामी।
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