
कपि रामदूत कहलाए,
जब लंका जलाने आए,
कपि राम दूत कहलाए,
तर्ज – मनिहारी का भेष बनाया।
कभी इस डाल पर कभी उस डाल पर,
सारे फल फूल तोड़ गिराए,
बोला लंकेश्वर है बड़ा ये निडर,
अपनी भक्ति की शक्ति दिखाए,
जब वो पकडे गए धर के जकड़े गए,
पूँछ अपनी वो इतनी बढ़ाए,
आग बढ़ने लगी लंका जलने लगी,
हर तरफ हाहाकार मचाए,
जब वो शंकर सुवन किए लंका दहन,
इक विभीषण की कुटिया जलाए,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


