
करता तुम्ही और कारण तुम्ही
करता तुम्ही और कारण तुम्ही,
करते तुम्ही और तारण तुम्ही,
जीवन क्या राज समजा हु मैं समस्या तुम्ही और निवारण तुम्ही,
सब के कारण तुम्ही,
जीवन का क्या राज समजा हु मैं समयसा तुम्ही और निवारण तुम्ही,
सब के कारन तुम्ही,
तूने कहा मैं करता रहा मगर जान फिर भी क्यों डरता रहा,
बनता रहा और बिगड़ ता रहा,
खुद में खुदी से अकड़ ता रहा,
कारण तुम्ही और अकारण तुम्ही करते तुह्मीं और तारण तुम्ही,
अभी तक न समजा ये लगता है क्यों जिधर देखता हु उधर तू ही तू,
सब जान कर के भी पर्दा किया मैं क्या हु नहीं ध्यान इस पर दियां,
उपमा तुम्ही और उदहारण तुम्ही तरते तुम्ही और तारण तुम्ही,
संसार सावर की तरह हो तुम्ही नीले सावर की सत्ता हो तुम्ही
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