
करे मंगलवार का व्रत हम,
स्वीकार करो ना,
हम आये शरण तुम्हारी,
उद्धार करो ना,
जय जय बाबोसा,
तर्ज – करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं।
आये है बड़ी आशा से,
तुम्हारे दरबार में,
हम भटक भटक के हारे,
झूठे संसार में,
पलटा दो मेरी भी किस्मत,
चमत्कार करो ना,
अरदास लेकर आये,
दुख दर्द के मारे,
ये जीवन तुझको अर्पण,
ओ चुरू धाम वारे,
हम बालक है तुम्हारे,
उपकार करो ना,
है कलयुग के अवतारी,
हम पर करो महर,
तेरी नजर हो जिस पे बाबा,
फिर न कोई फिकर,
‘दिलबर’ ‘प्राची’ भक्तो के,
सिर पर हाथ धरो ना,
लेखक – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’।
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