
करना फकीरी फिर क्या दिलगिरी
सदा मगन में रेहना जी
कोई दिन हाथी ने कोई दिन घोड़ा
कोई दिन पैदल चलना जी
कैसा भी हो वक़्त मुसाफिर
पल भर न घबराना जी
कोई दिन लाडु ने कोई दिन पैदा
कोई दिन फाकम फाका जी
कोई फर्क नहीं होता है
राजा और भिकारी में
दोनों की साँसें काटीं हैं
समय की तेज़ क़तारी ने
अपनी ही रफ़्तार से हरदम
काल का पहिया चलता जी
कोई दिन मेहला ने कोई दिन सेजां
कोई दिन ख़ाक बिछौना जी
माँ से अच्छा कुछ न होता
माँ तू ही परमेश्वर है
हर डैम मेरे मन मन्दिर में
तेरी ज्योत उजागर है
सब रिश्ते नाते झूठे हैं
माँ का प्यार ही सच्चा जी
कोई दिन भैय्या ने कोई दिन बेहना
सब दिन माँ की ममता जी
कुछ भी पाये गर्व न करियो
दुनिया आणि जानी है
तेरे साथ जहां से तेरी
परछाई भी जानी है
सब को अपना प्यार बांटना
मीठा बोल बोलना जी
कोई दिन मेला ने कोई दिन अकेला
कोई दिन ख़त्म झमेला जी
करना फकीरी फाई क्या दिलगिरी
अपलोड- रवि सेन नरसिंहगढ़ "पांजरी"
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