
कलयुग ये कैसी उल्टी गंगा बहा रहा है,
माता पिता को शरवण ठोकर लगा रहा है,
माता पिता को शरवण आँखे दिखा रहा है।।
पहले था एक रावण और एक ही थी सीता,
पहले था एक रावण एक ही थी सीता,
अब हर गली में रावण, सीता चुरा रहा है,
कह दो हर एक बहन से अब तो सतर्क रहना,
पापी भी अब यहाँ पर राखी बंधा रहा है,
इतिहास क्या लिखेगा अब वो महान भारत,
अब हर गली में अर्जुन रिक्शा चला रहा है,
मजदुर का एक बेटा रोटी को तरस रहा है,
पर सेठ जी का कुत्ता रबड़ी को खा रहा है,
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